

*पॉलिथीन में चाय का जहर: नगर की होटलों में खुलेआम परोसा जा रहा कैंसर*
कटनी। नगर की कई होटलों और चाय की दुकानों पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर पॉलिथीन में चाय दी जा रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए एक घातक खतरा भी बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलिथीन में गर्म चाय डालने से होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को निमंत्रण दे रही है।
*धीमा जहर है प्लास्टिक की चाय*
वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि जब अत्यधिक गर्म चाय को पतली प्लास्टिक की थैलियों में डाला जाता है, तो प्लास्टिक के सूक्ष्म कण और हानिकारक रसायन (जैसे बिस्फेनॉल-ए) चाय में घुल जाते हैं। यह रसायन शरीर के भीतर जाकर ‘स्लो पॉइजन’ (धीमा जहर) की तरह काम करते हैं। इससे शरीर के आंतरिक अंगों को भारी नुकसान पहुँचता है और अक्सर बीमारी का पता तब चलता है जब वह अंतिम चरण में पहुँच चुकी होती है।
*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
होटल संचालकों द्वारा बरती जा रही इस लापरवाही पर अब तक नगर निगम और खाद्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
*नगरीय निकाय की जिम्मेदारी: स्थानीय निकायों को नियमित निरीक्षण कर ऐसी होटलों पर जुर्माना लगाना चाहिए।
*कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग:* जागरूक नागरिकों का मानना है कि जिला कलेक्टर को इस विषय में कड़े निर्देश जारी करने चाहिए। प्रशासन की सख्ती ही होटल संचालकों को पॉलिथीन का उपयोग बंद करने और ग्राहकों की जान से न खेलने के लिए मजबूर कर सकती है।
*जनता से अपील*
स्वास्थ्य के प्रति सजगता ही बचाव है। ग्राहकों को भी चाहिए कि वे पॉलिथीन में चाय लेने से इनकार करें और स्टील के बर्तन या कुल्हड़ का उपयोग करने पर जोर दें।